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कैकसी, रावन ओर सूर्पनखा तीनो कठिन दुर्गम पहाडियों के रास्ते को पार करके, समुद्र को पार करके , अब सिंघल दीप के कठिन दुर्गम रास्ते पर चल रहे थे.
सूर्पनखा ने पूछा “ माँ अब तो मंजिल नजदीक आ गई है ना ?“
“पुत्री हमेशा याद रखो जब मंजिल की ओर चल रहे हो तो शुरुवात में ओर जब
मंजिल के नजदीक हो तब ज्यादा सतर्क रहो इसलिए अभी कुछ मत सोचो बस चलते रहो जब तक मंजिल पर ना पहुच जाओ“ कैकसी ने कहा
“लेकिन माँ आप हमें यहाँ क्यों ले जा रहीं है ?” अब रावन ने पूछा
“रावन तुमने युद्ध की शिक्षा प्राप्त की है अब यहाँ तुम्हारी प्रतिभा की
परीक्षा होगी तुम्हारे पिता तो मात्र तुमसे मात्र देवताओ की स्तुतिया ही करवाते “कैकसी
ने कहा
