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( अंतिम भाग )
“ उनके लिए मै आतंकवादी के उपनिवेश बनाऊगा “
रावण ने योजना बताई
“ आतंकवादी ? ? ? ये क्या है ?” शुक्राचार्य
ने आश्चर्य से पूछा
“गुरुदेव आतंकबादी वो
आताताई होगे जो जगह जगह उपनिवेश बना कर उस राज्य में उत्पात मचाएगे ताकि वहा की
शांति भंग हो जाये उस राज्य की शांति भंग कर राज्य को कमजोर करेगे , प्रजा को
भयभीत करेगे इतना भयभीत करेगे की प्रजा राजा का विरोध करे और राजा का मनोबल कमजोर
हो जाये ,कमजोर मनाबल का राजा चाहे कितना ही पराक्रमी ही क्यों न हो आसानी से
पराजित किया जा सकता है “ रावण ने कहा
“ परंतू रावण कोई भी राजा अपने राज्य में
यैसे आतंकबादी उपनिवेश क्यों बनाने देगा ?” शुक्राचार्य ने पूछा
“ गुरुदेव राजा उपनिवेश नहीं बनाने देगे वो
तो राज्य की स्वार्थी और लालची प्रजा बनवाएगी एक बार उपनिवेश बन जाये फिर वही
स्वार्थी प्रजा आतंकबादीओ से डरेगी भी परंतू अपनी गलती ना मान कर सारा दोष राजा को
देगी तभी तो राजा कमजोर होगा “ रावण ने बताया
शुक्राचार्य मुस्कुराने लगे उन्हें एक बार
लगा रावण का मनोविज्ञान उच्च कोटि का है उन्होंने रावण से फिर पूछा “ रावण इन
आतंकबादी उपनिवेश से काम क्या करवाओगे ?”
“ गुरुदेव इन आतंकबादी संगठनो का कार्य प्रजा
को भयभीत करना अपनी जाति का विस्तार करना होगा जिसके लिए ये प्रजा के आस्था के
केंद्र जैसे ऋषि मुनि के आश्रम में आघात करेगे , जनता को भय और लालच से राक्षस
बनायेगे , उनकी कन्याओ को प्रेम जाल में फसा कर, या भय से लालच से कैसे भी विवाह
कर नए राक्षस पैदा करेगे , इन्हें संरक्षण और आवश्यक जनबल धनबल मै दूगा “ रावण ने
कहा
“ तो क्या इतना सब करने में इन्हें राज्य के
राजा का भय नहीं होगा ?” शुक्राचार्य ने पूछा
“ नहीं गुरुदेव जब स्थानीय प्रजा का साथ
मिलेगा तो इन्हें किसी का भी भय नहीं होगा “ रावण ने कहा
“ रावण इस प्रकार से तुम तो प्रजा के शरीर पर
ही नहीं उसके मस्तिष्क पर भी रक्ष संस्कृति को भर दोगे” शुक्राचार्य मुस्कुराने
लगे