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Fish swimming from right to left आर्यान : एक अलोकिक योद्धा एक ऐसे योद्धा की कहानी जिसके आगे इंसान तो क्या देवता भी झुक गये. जुड़िये हमारे साथ इस रोमांचित कर देने वाले सफ़र पर .... कहानी प्रारंभ - बदले की भावना शीर्षक से

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Thursday, 1 January 2015

बदले की भावना - 3

बदले की भावना : विनाश को जन्म देती है


“हाँ पिता श्री आपने बताया नहीं आपकी योजना क्या है ? “केकसी ने मदिरा पान  करते समय पूछा .
“केकसी मेरी योजना में तुम्हे बलिदान  होना पड़ेगा“  सुमाली ने कहा
“पिता श्री मै हर बलिदान के लिए तत्पर हूँ  अगर मेरी जाति का गौरव पुनःप्राप्त होता है“ केकसी बोली

“सुमाली तुम अपनी योजना तो स्पष्ट करो“ माल्यवान ने कहा

“भ्राता आज मैंने विश्रवा के पुत्र और दुष्ट देवताओ के धनाधिपति कुबेर को देखा“ सुमाली ने बताया
“हाँ कुबेर मय की नगरी लंका में रहता है वैसे तो उसकी नगरी अलकापुरी थी लेकिन उससे हमें क्या?“ माली ने पूछा


“अगर हमारे बीच भी ऐसा ही कोई तेजस्वी पुरुष हो तो हमारी जाति का उत्थान सुनिश्चित है“  सुमाली ने कहा

“लेकिन कुबेर को तो दुष्ट देवो का और मुर्ख आर्यों का समर्थन प्राप्त है यही नहीं मैंने तो सुना है उसे कैलाश पति शिव भी पसंद करते है वो कुबेर हमारा साथ क्यों देगा ?” माली ने आश्चर्य से पूंछा
“कुबेर नहीं , मैंने कहाँ कुबेर जैसा“  सुमाली ने संसोधन के साथ बताया

“वो कैसे ?” माल्यवान ने पूंछा

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