बदले की भावना :विनाश को
जन्म देती है
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उस समय वर्तमान ईरान से लेकर सदूर दखिण का भाग आर्याबर्ट कहलाता था हिमालय
के तलहटी स्थान पर देव जाति का आधिपत्य था जिनके राजा इंद्र कहलाते थे हिमालय के
पूर्वी भाग वर्तमान तिब्बत –चीन का के मन सरोबर के पास स्थान कैलास कहलाता था जहाँ
के अधिपति शिव ,शंकर,रूद्र महादेव आदि कई नमो से सम्मानित थे बर्तमान पेशावर से
गाजी खां का स्थान गन्धर्वो का था जिनके राजा मित्रबसु थे .हिमालय से नीचे दखिण
में मध्य भारत में कई आर्य राजाओ के राज्य
थे .
बर्तमान
मध्य प्रदेश से छत्तीस गढ़ के स्थान को आरण्य कहा जाता था .जहाँ कई ऋषिओ ने अपने
उपनिवेश बना रखे थे जिनका मुख्य कार्य अध्धापन था .इसके अतिरिक्त अस्त्रों –
शस्त्रों की प्रयोग शालाएं भी यहाँ होती थी . सामाजिक ब्यबस्था की देख रेख में भी
इन आश्रमों की बड़ी भूमिका होती थी . ये आश्रम शहर के शोर से दूर एकांत में होते थे
.बर्तमान कर्नाटक के आस पास का स्थान किष्किन्धा राज्य का था .यहाँ भी कई छोटे
छोटे राज्य थे .यहाँ मुख्य रूप से बानर जाति और रीछ जाति का राज्य था यहाँ के
प्रमुख राजा बाली थे .इसके आगे समुद्र तलहटी के समीप नागा जाति का राज्य था .